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भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन परियोजना : मुख्य बिंदु

2018 के अंदर हस्ताक्षरित भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन परियोजना (India-Bangladesh Friendship Pipeline Project), भारत के अंदर, पश्चिम बंगाल के अंदर, सिलीगुड़ी तथा बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के परबतीपुर को जोड़ेगी। भारत से मैत्री पाइपलाइन जून से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति आरंभ करेंगी। भारत से डीजल आयात करने हेतु 131.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का की गई है, जिसमें से यह 126.5 किमी बांग्लादेश के अंदर तथा 5 किमी भारत के अंदर है। IBFPL परियोजना का मकसद आयातित ईंधन तेल के परिवहन को सुविधा अनुरूप बनाना तथा बांग्लादेश हेतु इसकी परिवहन लागत को घटना है।

भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन परियोजना : मुख्य बिंदु
भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन परियोजना : मुख्य बिंदु

डीजल आयात की प्री-कमीशनिंग

इस पाइपलाइन के माध्यम से डीजल आयात की प्री-कमीशनिंग का वर्क फिलहाल चालू है।
यह अंतर्राष्ट्रीय पाइपलाइन, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) के सिलीगुड़ी स्थित मार्केटिंग टर्मिनल से लेकर बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के पारबतीपुर डिपो तक डीजल को ले पहुंचाएगी।

पृष्ठभूमि

  • भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन (IBFPL) हेतु ग्राउंडब्रेकिंग समारोह सितंबर 2018 के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की ओर से आयोजित किया गया था।
  • इस पाइपलाइन की क्षमता 1 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) है तथा इसे भारत सरकार से अनुदान मदद के तहत तैयार किया जा रहा है।
  • यह ईंधन तेल उत्पादों को पश्चिम बंगाल राज्य के अंदर भारत के सिलीगुड़ी मार्केटिंग टर्मिनल से लेकर बांग्लादेश के अंदर निर्यात हेतु सक्षम बनाएगा।

ईंधन तेल पर ढाका-दिल्ली समझौता?

ढाका-दिल्ली समझौते के मुताबिक, प्रथम चरण के अंदर पाइपलाइन के द्वारा 15 साल हेतु ईंधन तेल बांग्लादेश पहुंचा दिया जाएगा तथा देशों की सहमति के आधार पर यह समय अवधि बढ़ाई जा सकती है।

आगे का रास्ता

  • भारत-बांग्लादेश के मध्य द्विपक्षीय व्यापार के अंदर लगातार बढ़ोतरी हुई है।
  • 2020 के अंदर, साल-दर-साल 14% की बढ़ोतरी हुई, जो प्राप्त करने हेतु एक बहुत ही उत्साहजनक आंकड़ा है।
  • भारत को बांग्लादेश का निर्यात अरबों डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है तथा यह अत्यधिक स्थिर आधार पर वृद्धि कर रहा है।
  • 2021-22 के अंदर, बांग्लादेश दक्षिण एशिया के अंदर भारत हेतु सबसे बड़ा व्यापार हिस्सेदार तथा दुनिया भर के अंदर भारतीय निर्यात हेतु चौथा सबसे बड़ा गंतव्य बनकर ऊपर आया है।

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